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हवा पानी पक्षपात अन्याय जातिवाद नेनुआ कटहल यहाँ ख़ुद से तो यारो दग़ा कोई नहीं करता वादा हूँ करता कोई महसूस नहीं करता दिल अपना भी है रोता वो मंजिल ही नहीं तेरी है तू जिसके लिए भागे

Hindi पक्षपात नहीं करता Poems